बस अब बहुत हो चुका ...




बस अब बहुत हो चुका 
अब इससे ज़्यादा मैं सह नहीं सकती 
आओ आमने सामने बैठकर हिसाब कर ले 
जो आज तक एक दूसरे को दिया है वो वापीस ले ले 

मैं खर्चा है आज तक जो
वो लौटा दो मुझे वह लम्हे इंतज़ार के...
वो उम्मीदों से भरे ख़याल 
वो सपनों का घर...
वो चाँदनी रातें...
लौटा दो सब कुछ...
वो अधूरी रात... वो मुलाक़ातें 

ले जाओ अपना सामान 
वो ग़म वो अधूरी अरमान वो नाकाम मुहब्बत...
वो अनकहे जज़्बात...
वो टूटे सपने सारे...
वो अंचलके आँसू...
ले जाओ सब कुछ...
मैंने बहुत सहा है...
अब तुम सहो कुछ

बस, तुम्हारी एक चीज़ अपने पास रख रही हूँ 
“तुम्हारी यादें”
जो तुमसे बहुत अच्छी हैं...
चाहो तो उसके बदले तुम मेरा दिल रख लो 
जिसमें आज भी तुम्हारे लिए मुहब्बत बसी है 

बहुत दिया है तुमने एक मुहब्बत के सिवा
और मैं...
मैं नाकाम मुहब्बत के सिवा कुछ दे ना सकी...
मुझे माफ कर दो. 




Return to Main Page

~